रविवार, 9 सितंबर 2012

ख्वाब उनकी यादों का | ३०-११-२००७

ये मुझे क्या हो गया ,मेरा दिल मेरी बात ना सुन रहा |
चैन दिल का खो गया मेरा दिल मेरे बस में ना अब रहा ||
कुछ कहता  हूँ ,कुछ करता है ,
कुछ करता हूँ, कुछ हो जाता है , 
कोई समझाए इसे!

किसी की  सूरत पे ये मर गया , मेरा दिल बेगाना हो गया |
जो था वो भी खो गया ,जो अपना था वो भी गया ||
दिल में तस्वीर बनाता हूँ ,
उसकी यादों को मै सजाता हूँ,
उसका चेहरा नुरानी याद  आता है ,
ओ हर पल याद आये मुझे !

क्या सूरत थी ,सूरत उसकी मुमताज बेगम की तरह| 
चाँद सा मुखडा उसका ,लग रहा ओ परियों की  तरह ||
लगी जन्नत से ओ आयी है ,
आशा मेरे मन में ओ जगाई है ,
कोई बताये उसे !

मै रह ताकता रहा ,चकोर - चाँद की  तरह |
वो ना आयी इधर मै फिर भी आस करता  रहा  ||
मन में उम्मीद आया है , 
प्यारा सा ख्याल लाया है ,
तु बन मेरी  ,मै बनू तेरा ,
कोई बताये उसे !

तुझे याद करूँ मै हर लम्हा तेरे सिवा ना कोई काम  रहा|
तेरी याद ही है करार मेरा मेरे दिल का चैनों सकूँ मेरा||

:: राम प्रकाश कुशवाहा "औलिया"
(dictionary :: Mukda/Mukhada,surat = Face;Nurani=beautiful; tera=yours; )
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