ये मुझे क्या हो गया ,मेरा दिल मेरी बात ना सुन रहा |
चैन दिल का खो गया मेरा दिल मेरे बस में ना अब रहा ||
कुछ कहता हूँ ,कुछ करता है ,
कुछ करता हूँ, कुछ हो जाता है ,
कोई समझाए इसे!
किसी की सूरत पे ये मर गया , मेरा दिल बेगाना हो गया |
जो था वो भी खो गया ,जो अपना था वो भी गया ||
दिल में तस्वीर बनाता हूँ ,
उसकी यादों को मै सजाता हूँ,
उसका चेहरा नुरानी याद आता है ,
ओ हर पल याद आये मुझे !
क्या सूरत थी ,सूरत उसकी मुमताज बेगम की तरह|
चाँद सा मुखडा उसका ,लग रहा ओ परियों की तरह ||
लगी जन्नत से ओ आयी है ,
आशा मेरे मन में ओ जगाई है ,
कोई बताये उसे !
मै रह ताकता रहा ,चकोर - चाँद की तरह |
वो ना आयी इधर मै फिर भी आस करता रहा ||
मन में उम्मीद आया है ,
प्यारा सा ख्याल लाया है ,
तु बन मेरी ,मै बनू तेरा ,
कोई बताये उसे !
तुझे याद करूँ मै हर लम्हा तेरे सिवा ना कोई काम रहा|
तेरी याद ही है करार मेरा मेरे दिल का चैनों सकूँ मेरा||
:: राम प्रकाश कुशवाहा "औलिया"
(dictionary :: Mukda/Mukhada,surat = Face;Nurani=beautiful; tera=yours; )
without written permission of Ram Prakash ,commercially print /distribute /use of any of this blog poetry is /are prohibited||subject to Aurangabad (bihar) jurisdiction only.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
हमें आपकी राय जानने की इच्छा है ....