तेरी यादों का क्या करूँ अब
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तेरी बातों का क्या करूँ
अब||
ओ पल ही न रहा जब |
मै, मैं ही न रहा , तू ,तू ही
न रही अब ||
खाबों में ही बस रह गयी तू
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मेरी यादों में बस गयी अब||
अब अश्क ही है अपने |
जो आँखों में रह गए अब||
वो बातों में रह गया पल |
सांसों में रह गयी महक अब
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बस सांसें बची हुयी है |
जिस्म में जां ही नहीं रही
अब||
तू मेरी न बन सकी, न तेरा मैं
रहा अब||
::राम प्रकाश कुशवाहा "औलिया"
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