मंगलवार, 25 अप्रैल 2017

यादों का क्या करूँ अब ..... एक बेबस सी यादें ... अप्रैल २०१७

तेरी यादों का क्या करूँ अब |
तेरी बातों का क्या करूँ अब||

ओ पल ही न रहा जब |
मै, मैं ही न रहा , तू ,तू ही न रही अब ||

खाबों में ही बस रह गयी तू |
मेरी यादों में बस गयी अब||

अब अश्क ही है अपने |
जो आँखों में रह गए अब||

वो बातों में रह गया पल |
सांसों में रह गयी महक अब ||

बस सांसें बची हुयी है |
जिस्म में जां ही नहीं रही अब||

तक़दीर तक़दीर की बात है |

तू मेरी न बन सकी, न तेरा मैं रहा अब|| 

::राम प्रकाश कुशवाहा "औलिया"

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