रविवार, 8 जुलाई 2012

बदलते लब्ज ......

प्यार में था तब ........................

उगता सूरज शाम में ढल जाता है,

पर तेरी याद दिल में हर दम रहता है |

चांदनी रात में जब  चाँद को देखता हूँ ,

तेरा चेहरा चाँद में नजर आता है ||


और  जब दिल टुटा तब...


उगता सूरज शाम में ढल जाता है,

पर तेरी याद दिल में हर दम रहता है |


चांदनी रात में जब  चाँद को देखता हूँ ,

तेरा चेहरा चाँद में अब भी नजर आता है ||


::राम प्रकाश कुशवाहा "औलिया"
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जब याद तेरी आती है ...८-८-२००७

ठंडी आह मुझे  तड़पाती है,

 जब-जब याद तेरी मुझे आती है |



याद कर लेता हूँ बीते ज़माने को,
 क्षण भर खुश हो लेता हूँ  ,



खुशी तो मेरी खामोश हुयी इस कदर,
 भूल गया मैं हँसना उम्र भर |



फिर भी मीठी यादें कभी-कभी हँसा जाती है ,
जब-जब याद तेरी मुझे आती है |



दिल में एक तीर सी चुभ जाती है ,
दिल तो संभल गया है|



 पर आँखें नम हो जाती है ,
जब -जब याद मुझे तड़पाती है |



अब याद क्या करूँ तुझे बेवफ़ा,
 पर कमबख्त दिल है ,जो गुश्ताखी कर देता है|



समझाता हूँ तो समझ जाता है,
पर कुछ क्षण बाद फिर याद तुझे ही करता है.

::राम  प्रकाश  कुशवाहा  "औलिया "