ठंडी आह मुझे
तड़पाती है,
जब-जब याद तेरी मुझे आती है |
याद कर लेता हूँ बीते ज़माने को,
क्षण भर खुश हो लेता हूँ ,
खुशी तो मेरी खामोश हुयी इस कदर,
भूल गया मैं हँसना उम्र भर |
फिर भी मीठी यादें कभी-कभी हँसा जाती है ,
जब-जब याद तेरी मुझे आती है |
दिल में एक तीर सी चुभ जाती है ,
दिल तो संभल गया है|
पर आँखें नम हो जाती है ,
जब -जब याद मुझे तड़पाती है |
अब याद क्या करूँ तुझे बेवफ़ा,
पर कमबख्त दिल है ,जो गुश्ताखी कर देता है|
समझाता हूँ तो समझ जाता है,
पर कुछ क्षण बाद फिर याद तुझे ही करता है.
::राम प्रकाश कुशवाहा "औलिया "
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
हमें आपकी राय जानने की इच्छा है ....