बुधवार, 27 जून 2012

गलत समझी तो समझी कैसे ?१६-७-२००७

तुने मुझे गलत समझी तो समझी कैसे ?

मैंने तो अपने दिल की बात कही पर तू गलत समझी कैसे ?

शायद ये मेरी गलती थी जो मैं तुम्हे अपने दिल का हाल कहा.

पर तू इसे गलत समझी तो समझी कैसे ?

उतावलापन सही होता है पर ज्यादा सही नहीं होता.

मेरा उतावलापन देखकर शायद गलत समझी मुझे.

मेरे प्यार के इजहार में कुछ गलत नहीं था |

पर तुने उसे गलत समझी तो समझी कैसे ?

हर दिल की बातें नहीं करता मै अपने दिल की करता हूँ ,

दिल से दिल नहीं मिला तो इसे समझूँ कैसे?

अब शायद आखरी हो गुजारिश मेरी 
ये मेरे दिल की आवाज है पर मै अब अपने दिल को समझाऊँ कैसे?
:::राम प्रकाश कुशवाहा "औलिया"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

हमें आपकी राय जानने की इच्छा है ....