बुधवार, 13 जून 2012

पर उसने बुरा मान लिया ....१६-७-२००७


बहुत कुछ सोचा था ,पर 
रेत पर महल बनाने चला था .


झोका हवा का लहरों के साथ 
अपने में मिला गया.

बदनसीबी मेरी थी ,जो 
नसीब को बनाने चला था .

बिजली गिरी झंझावत के साथ 
अपने में मिटा गयी.

सोचा था अच्छा पर, उसने
 बुरा मान लिया.


पर मै खड़ा मूक सा चेहरे पर 
उभरती भावों को देखता रह गया .

:::: Ram Prakash Kushwaha 'aulia'

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