दिल जलता है इस दिल की आग बुझाऊँ कैसे?
जले पर मैंने खुद नमक छिड़का अब जलन मिटाऊँ कैसे?
माना मेरी गलती थी पर अब इसे सुधारूँ कैसे?
तुमने तो बहुत कुछ बोला एहसास के बारे में ,
पर मैं अब अपनी एहसास तुम्हें सुनाऊँ कैसे?
तेरी कद्र करता था,तेरी सपने देखा करता था ,
पर मै अब इन बातों को तुम्हें समझाऊँ कैसे?
तुने मुझे गलत समझ लिया,
अब सही बातें तुम्हे समझाऊँ कैसे?
तेरी बातों को मैंने अपने नसीब से जोड़ा,
पर अब अपने बदनसीब दिल को समझाऊँ कैसे?
दिल संभलता नहीं ,रोते दिल को दिलासे दूँ तो अब दूँ कैसे?
दिल जलता है इस दिल की आग
बुझाऊँ कैसे?
::::by:Ram Prakash Kushwaha "aulia"
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