मंगलवार, 25 अप्रैल 2017

यादों का क्या करूँ अब ..... एक बेबस सी यादें ... अप्रैल २०१७

तेरी यादों का क्या करूँ अब |
तेरी बातों का क्या करूँ अब||

ओ पल ही न रहा जब |
मै, मैं ही न रहा , तू ,तू ही न रही अब ||

खाबों में ही बस रह गयी तू |
मेरी यादों में बस गयी अब||

अब अश्क ही है अपने |
जो आँखों में रह गए अब||

वो बातों में रह गया पल |
सांसों में रह गयी महक अब ||

बस सांसें बची हुयी है |
जिस्म में जां ही नहीं रही अब||

तक़दीर तक़दीर की बात है |

तू मेरी न बन सकी, न तेरा मैं रहा अब|| 

::राम प्रकाश कुशवाहा "औलिया"

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सोमवार, 17 अप्रैल 2017

क्या करें कि तुम समझोगे.......बेबसी ....मार्च २०१७

दिल ने इतने दर्द झेले है साहब!
अब कोई जख्म दर्द नहीं देते||

देता है तो दर्द वही जिसे हम अपना समझते हैं|

क्या करे हम अपने आदत से मजबूर है|
हम अपनी आदत से गुरेज नही करते,
कोई सख्स आता है मदद लेने हमसे||

बेझिझक बे समझे बुझे मदद कर देते है|
और हमें कल को वही सख्स , बड़ी इज्जत से दगा देते है||

जाने क्यों दिल समझता नही
नासमझ समझ कर भी नासमझी कर जाता है ये|

क्या करें कि तुम समझोगे बता दो ऐ सनम |
सब लुटा के भी न समझे तो हम क्या करे ||

खाली हाथ आये , खाली ही जाना है|
जान बुझ कर भी रखे तो हम क्या करे||

तेरे हाथ में न कुछ है न होता है बन्दे

सब रहमो करम खुदा के मर्जी से है|

जानकर भी दुहाई दे तो हम क्या करे||

::राम प्रकाश कुशवाहा "औलिया"

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शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

ऐसा कुछ कर जा ऐ जिंदगी....एक ख्वाहिस..जुलाई २०१६


ऐसा कुछ कर जा ऐ जिंदगी, सकूँ से ही सकूँ मिले |
न हो उदास सी ये जिंदगी , कुछ ऐसी वजह मिले ||

बनकर इन्सान सा रहू मैं, अपने दुखी न हों|
ऐसा कर जा ऐ जिंदगी ............................||
न हो उदास सी ये....................................|

आदतें  सब हो, बातें सब हो, बातों औ आदतों में सभी शामिल |
मेरी बातों से न किसी का दिल दुखें, मेरी आदतों से न सिकवा हो कभी||

ऐसा कुछ कर जा ऐ ...........................|
न हो उदास सी ये ...............................||

आँखों में बसी हो जो बेबसी उसे ख़ुशी में बदल दूँ|
जो उदास सी हो किसी की जिंदगी , उसे हंसी में बदल दूँ||

कुछ ऐसा करम कर ऐ जिंदगी मेरी वजह से ख़ुशी मिले |
न हो उदास सी ये जिंदगी ...............................||


::राम प्रकाश कुशवाहा "औलिया"

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शनिवार, 20 अक्टूबर 2012

तेरा हूँ मै बस तेरा ! १-१२-२००७

मै तेरे प्यार में  पागल हूँ , मै तेरा हूँ मै बस तेरा !
तु मेरी बनकर रहना सदा, मै तेरा हूँ मै बस तेरा!

मै तेरे प्यार को याद करूँ तो, कट जाता सारा दिन मेरा |
मै तेरे चहरे का किताब पढूं ,दिन हो या हो रात सही !

तु मेरे ख्वाबों में खोयी रहो ,रब से मेरी दरख्वास्त यही..!

तु सुन मेरी या ना ही सही, दिल की सुन लेना बस यार सही|
मेरे दिल की आवाज़ है तु, तु मेरी है बस है मेरी !

दिल का करार खो जाता है, हो जाता हूँ बेचैन बड़ी |
मेरे जीवन की रास है तु, तु दिल की  है अब चैन मेरी !

तु मेरे जीने का सहारा है, इस कश्ती का सहारा तुही !
तु ही मेरी मंजिल तु ही, अब तेरे सिवा कुछ और नहीं!

तेरे प्यार में जीना है, तेरे प्यार को पाना है मुझको |
तु मुझको भूल ना जाना कहीं, ये प्यार है कोई खेल नहीं!

रब से एक गुजारिश है मेरी ,सारा जीवन मै बिताऊं साथ तेरे|
मै तेरे माथे की बिंदिया बनू, तु मेरे दिल की  रानी बने ||
::राम प्रकाश कुशवाहा "औलिया"

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रविवार, 9 सितंबर 2012

ख्वाब उनकी यादों का | ३०-११-२००७

ये मुझे क्या हो गया ,मेरा दिल मेरी बात ना सुन रहा |
चैन दिल का खो गया मेरा दिल मेरे बस में ना अब रहा ||
कुछ कहता  हूँ ,कुछ करता है ,
कुछ करता हूँ, कुछ हो जाता है , 
कोई समझाए इसे!

किसी की  सूरत पे ये मर गया , मेरा दिल बेगाना हो गया |
जो था वो भी खो गया ,जो अपना था वो भी गया ||
दिल में तस्वीर बनाता हूँ ,
उसकी यादों को मै सजाता हूँ,
उसका चेहरा नुरानी याद  आता है ,
ओ हर पल याद आये मुझे !

क्या सूरत थी ,सूरत उसकी मुमताज बेगम की तरह| 
चाँद सा मुखडा उसका ,लग रहा ओ परियों की  तरह ||
लगी जन्नत से ओ आयी है ,
आशा मेरे मन में ओ जगाई है ,
कोई बताये उसे !

मै रह ताकता रहा ,चकोर - चाँद की  तरह |
वो ना आयी इधर मै फिर भी आस करता  रहा  ||
मन में उम्मीद आया है , 
प्यारा सा ख्याल लाया है ,
तु बन मेरी  ,मै बनू तेरा ,
कोई बताये उसे !

तुझे याद करूँ मै हर लम्हा तेरे सिवा ना कोई काम  रहा|
तेरी याद ही है करार मेरा मेरे दिल का चैनों सकूँ मेरा||

:: राम प्रकाश कुशवाहा "औलिया"
(dictionary :: Mukda/Mukhada,surat = Face;Nurani=beautiful; tera=yours; )
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