रविवार, 8 जुलाई 2012

बदलते लब्ज ......

प्यार में था तब ........................

उगता सूरज शाम में ढल जाता है,

पर तेरी याद दिल में हर दम रहता है |

चांदनी रात में जब  चाँद को देखता हूँ ,

तेरा चेहरा चाँद में नजर आता है ||


और  जब दिल टुटा तब...


उगता सूरज शाम में ढल जाता है,

पर तेरी याद दिल में हर दम रहता है |


चांदनी रात में जब  चाँद को देखता हूँ ,

तेरा चेहरा चाँद में अब भी नजर आता है ||


::राम प्रकाश कुशवाहा "औलिया"
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